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   शोध, विकास और विस्तार

 

पीसीआरए के महत्वपूर्ण उद्देश्यों में से एक है ''पेट्रोलियम संरक्षण और वातावरण की सुरक्षा के लिए किए जाने वाले शोध, विकास और विस्तार के प्रयासों को ब़ढ़ावा देना, पेट्रोलियम संरक्षण और वातावरण की सुरक्षा के लिए किए जाने वाले प्रयासों को समर्थन और सहायता देना, ईंधन की बचत करने वाली तकनीकें अपनाने और उनके प्रचार और पेट्रोलियम उत्पादों के स्थान पर वैकल्पिक और पुनः उपयोग किए जाने योग्य ईंधनों का उपयोग करना.
 
प्र. पीसीआरए द्वारा चलाई जा रही विभिन्न गतिविधियाँ क्या हैं?
उ. पीसीआरए द्वारा चलाई जा रही शोध और विकास संबंधी विभिन्न गतिविधियाँ निम्न हैं:
  • नामी शोध संस्थानों, तकनीकी संस्थानों, सीएसआईआर प्रयोगशालाओं आदि में शोध और विकास की ऐसी गतिविधियाँ आमंत्रित करना और उन्हें प्रायोजित करना, जिनका प्राथमिक उद्देश्य अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों, जैसे उद्योग, परिवहन, कृषि और घरेलू क्षेत्र में ईंधन बचाने वाली तकनीकों, प्रक्रियाओं, औज़ारों और उपकरणों का निर्माण हो. शोध और विकास कार्यक्रम के सफल हो जाने पर पीसीआरए इच्छुक उद्यमियों को तकनीक हस्तांरित करके तकनीक, प्रक्रियाओं, औज़ारों और उपकरणों के व्यावसायिक उत्पादन में मदद करता है.

  • पेट्रोल/डीज़ल चलित वाहनों के लिए ईंधन की कीमतें कम रखने और उनके द्वारा छोड़े गए प्रदूषकों की मात्रा कम रखने के लिए एडिटिव्स/डिवाइसेज़ की क्षमताओं का मूल्यांकन करना. प्रयोगशाला में मूल्यांकन पूर्ण होने पर एडिटिव्स/डिवाइसेज़ को इंजिन/वाहन निर्माताओं और तेल कंपनियों के साथ मिलकर गहन परीक्षण के लिए अनुशंसित किया जाता है जिससे यह पता लग सके कि अंतिम उपयोगकर्ता को उनके उपयोग पर कितना व्यय करना पड़ेगा. यदि एडिटिव/डिवाइस इन परीक्षणों के दौरान भी किफ़ायती और कम प्रदूषण वाला सिद्ध होता है, तो उसे बाज़ार में विक्रय के लिए अनुमोदित कर दिया जाता है.

  • वैज्ञानिक एवं औद्योगिक शोध संगठन के तौर पर अनुमोदन के लिए पीसीआरए की गतिविधियों का वार्षिक प्रतिवेदन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के समक्ष प्रस्तुत करना.

  • किसी भी बाहरी एजेंसी से पीसीआरए को मिलने वाले अनुदान, सहायता के लिए आयकर में छूट प्राप्त करना.

  • तेल व गैस चलित उपकरणों, पेट्रोलियम उत्पादों और लुब्रिकेंट्‌स आदि के लिए बीआईएस (ब्यूरो आ़ॅफ इंडियन स्टैंडड्‌र्स) के विभिन्न मानकों के पुनरीक्षण/नवीनीकरण के लिए बीआईएस सेक्शनल कमेटियों की बैठकों में भाग लेना.

  • ईंधन के प्रतिस्थापन को ब़ढ़ावा देनाः जैसे पेट्रोलियम उत्पादों के स्थान पर ग़ैर-पेट्रोलियम उत्पादों का उपयोग करना और ऊर्जा के नवीकरण योग्य स्रोतों को ब़ढ़ावा देना.

  • ऊर्जा संरक्षण के वैश्विक परिप्रेक्ष्य के बारे में जागरूकता लाने के लिए एक विशेष परियोजना अनुभाग बनाना और पीसीआरए को ऊर्जा संरक्षण और ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाने के प्रयासों में दुनिया के प्रमुख संगठनों में से एक बनाने के लिए योजना बनाना.
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प्र. पीसीआरए द्वारा प्रयोग की जाने वाली विभिन्न प्रक्रियाएँ कौन-सी हैं?
उ. ईंधनक्षम तकनीकों, प्रक्रियाओं, औज़ारों, उपकरणों आदि के विकास को ब़ढ़ावा देने के लिए पीसीआरए विभिन्न अनुसंधान और विकास संस्थानों, सीएसआईआर प्रयोगशालाओं और तकनीकी संस्थानों आदि में ऐसी अनुसंधान और विकास परियोजनाएँ आमंत्रित करता और उन्हें प्रायोजित करता है जिनका प्राथमिक लक्ष्य पेट्रोलियम उत्पादों का संरक्षण और वातावरण की सुरक्षा करना हो. इस उद्देश्य के लिए, निम्न प्रक्रिया अपनाई जाती हैः
  • पीसीआरए प्रतिवर्ष भारत के प्रमुख अख़बारों में पेट्रोलियम उत्पादों के संरक्षण और वायु प्रदूषण में कमी लाने में मददगार तकनीक/प्रक्रियाओं, औज़ारों और उपकरणों के विकास के लिए देश के प्रख्यात शोध संस्थानों से परियोजना प्रस्ताव आमंत्रित करता है.

  • विभिन्न संस्थानों द्वारा परियोजना प्रस्तावों के बारे में दी गई जानकारी और उस प्रकार की परियोजनाओं पर पूर्व में किए गए काम की जानकारी एक मानक प्रश्नावली के द्वारा विकासकर्ता संस्था से ली जाती है. पीसीआरए परियोजना के लिए अच्छा प्रस्ताव तैयार करने में भी परियोजना का विकास करने वालों की सहायता करता है.

  • परियोजना प्रस्तावों की समीक्षा पीसीआरए की स्क्रीनिंग समिति द्वारा की जाती है जिसके अध्यक्ष पीसीआरए के कार्यकारी निदेशक होते हैं, और जिसके सदस्यों में एमओपीएंडएनजी, सदस्य शोध प्रयोगशालाओं, सीएचडी और विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के लोग होते हैं.

  • परियोजना के विकासकर्ता पीसीआरए की स्क्रीनिंग समिति के समक्ष उसकी तिमाही बैठक में विस्तृत प्रस्तुति देते हैं. यदि परियोजना से पेट्रोलियम उत्पादों की बचत होने/वायु प्रदूषण में कमी आने और व्यावसायिक संभावनाएँ होती हैं, तो स्क्रीनिंग समिति उसे पीसीआरए की कार्यकारी समिति को मंज़ूरी के लिए भेज सकती है.

  • पीसीआरए की कार्यकारी समिति भी अंतिम परियोजना प्रस्तावों की समीक्षा करती है, और परियोजना को प्रायोजित करने के वित्तीय परिणामों पर विचार करके उसे स्वीकृति दे सकती है.

  • स्वीकृत अनुसंधान और विकास परियोजनाओं के लिए परियोजनाओं के नियम और शर्तों के एक आपसी सहमति के प्रस्ताव पर पीसीआरए और परियोजना विकासकर्ता के द्वारा हस्ताक्षर किए जाते हैं जिसके बाद परियोजना के प्रस्तावों के आधार पर परियोजना प्रायोजित की जाती है.

  • परियोजना विकासकर्ता को परियोजना के बारे में व्यय की जानकारी के साथ ही प्रति तिमाही प्रगति की रिपोर्ट प्रस्तुत करनी पड़ती है, जिनकी पीसीआरए की स्क्रीनिंग समिति द्वारा समीक्षा की जाती है. पीसीआरए के अधिकारी भी समय-समय पर परियोजना की प्रगति की समीक्षा के लिए अनुमोदित परियोजनाओं की प्रयोगशालाओं का दौरा करते हैं.

  • परियोजना पूरी होने के बाद, परियोजना विकासकर्ता एक अंतरिम परियोजना प्रतिवेदन प्रस्तुत करता है. पीसीआरए की स्क्रीनिंग समिति द्वारा इसकी समीक्षा की जाती है और उनकी टिप्पणियाँ अंतिम परियोजना प्रतिवेदन में शामिल किए जाने के लिए परियोजना विकासकर्ता के पास भेजी जाती हैं. अंतिम परियोजना प्रतिवेदन की समीक्षा/स्वीकृति फिर से पीसीआरए की स्क्रीनिंग समिति द्वारा की जाती है. इसके बाद प्रतिवेदन पीसीआरए की कार्यकारी समिति के समक्ष अनुमोदन के लिए रखा जाता है.

  • परियोजना पूरी होने के बाद, परियोजना विकासकर्ता को बीआईएस/प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जैसे उपयुक्त प्राधिकरणों से तकनीकी/औज़ारों/उपकरणों के लिए अनुमोदन प्राप्त करने पड़ते हैं.

  • परियोजना के दौरान विकसित बौद्धिक संपदा जैसे जानकारी/प्रक्रिया/डिज़ाइन/तकनीक पीसीआरए और परियोजना के विकासकर्ता की साझा संपत्ति होती है. यदि उस पर कोई पेटेंट प्राप्त किया जाना हो, तो परियोजना विकासकर्ता अपने और पीसीआरए के नाम पर पेटेंट आवेदन लगाएगा. उसका खर्च परियोजना विकासकर्ता और पीसीआरए द्वारा बराबर वहन किया जाएगा.

  • पीसीआरए, पीसीआरए और परियोजना विकासकर्ता द्वारा मिलकर तय किए गए मूल्य पर तकनीक का किसी उद्यमी को हस्तांतरण करने में मदद करेगा जो तकनीक/औज़ारों/उपकरणों का व्यावसायिक उत्पादन करना चाहता हो. तकनीक के ऐसे हस्तांतरण से प्राप्त लाभ पीसीआरए और परियोजना विकासकर्ता द्वारा बराबर बाँट लिया जाएगा.
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